Vastu Tips: वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का मुख्य द्वार की दिशा

वास्तु शास्त्र, प्राचीन भारत की एक वास्तुकला और वास्तु सिद्धांतों का एक समूह है। यह हिंदू धर्म, जैन धर्म और बौद्ध धर्म में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का मुख्य द्वार घर की ऊर्जा का प्रवेश द्वार होता है। यह घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का मुख्य द्वार की दिशा हमेशा उत्तर-पूर्व, उत्तर, पूर्व या पश्चिम की ओर होनी चाहिए। ये दिशाएं शुभ मानी जाती हैं और वे घर में सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने में मदद करती हैं।

उत्तर-पूर्व दिशा

वास्तु शास्त्र के अनुसार, उत्तर-पूर्व दिशा सबसे शुभ दिशा है। यह दिशा भगवान ब्रह्मा का स्थान है, जो सृष्टि के देवता हैं। उत्तर-पूर्व दिशा में मुख्य द्वार होने से घर में समृद्धि, खुशहाली और शांति आती है।

उत्तर दिशा

उत्तर दिशा भी एक शुभ दिशा है। यह दिशा भगवान विष्णु का स्थान है, जो संरक्षण के देवता हैं। उत्तर दिशा में मुख्य द्वार होने से घर में सुरक्षा, स्वास्थ्य और लंबी उम्र आती है।

पूर्व दिशा

पूर्व दिशा भी एक शुभ दिशा है। यह दिशा भगवान सूर्य का स्थान है, जो जीवन का स्रोत हैं। पूर्व दिशा में मुख्य द्वार होने से घर में उन्नति, सफलता और ज्ञान आती है।

पश्चिम दिशा

पश्चिम दिशा भी एक शुभ दिशा है। यह दिशा भगवान शिव का स्थान है, जो विनाश के देवता हैं। पश्चिम दिशा में मुख्य द्वार होने से घर में शक्ति, साहस और आत्मविश्वास आती है।

वास्तु दोष

यदि घर का मुख्य द्वार इन दिशाओं में नहीं है, तो इसे वास्तु दोष माना जाता है। वास्तु दोष से घर में कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं, जैसे आर्थिक समस्याएं, स्वास्थ्य समस्याएं, पारिवारिक कलह आदि।

वास्तु दोष को दूर करने के उपाय

यदि आपके घर का मुख्य द्वार वास्तु दोष के अनुसार है, तो आप इसे वास्तु दोष को दूर करने के उपाय करके ठीक कर सकते हैं। कुछ सामान्य उपाय निम्नलिखित हैं:

  • मुख्य द्वार की दहलीज संगमरमर या लकड़ी की बनी होनी चाहिए।
  • मुख्य द्वार पर काले घोड़े की नाल लगाएं।
  • मुख्य द्वार पर ओम, स्वस्तिक, क्रॉस और रंगोली बनाएं।
  • मुख्य द्वार के सामने कोई पेड़ या छायादार स्थान न हो।

मुख्य द्वार की दिशा के लाभ:

  • उत्तर या उत्तर-पूर्व की ओर मुख्य द्वार होने से घर में धन, समृद्धि और बुद्धि का संचार होता है।
  • पूर्व की ओर मुख्य द्वार होने से घर में स्वास्थ्य, दीर्घायु और ज्ञान का संचार होता है।
  • पश्चिम की ओर मुख्य द्वार होने से घर में सौभाग्य, समृद्धि और सुख का संचार होता है।

मुख्य द्वार की दिशा के नुकसान:

  • दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम, उत्तर-पश्चिम या दक्षिण-पूर्व की ओर मुख्य द्वार होने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। इससे घर के निवासियों को स्वास्थ्य, धन, करियर और रिश्तों में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

मुख्य द्वार की दिशा में सुधार के उपाय:

यदि आपके घर का मुख्य द्वार वास्तु के अनुसार नहीं है, तो आप कुछ उपायों से इसे सुधार सकते हैं।

  • यदि आपका मुख्य द्वार दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम की ओर है, तो आप दरवाजे के ऊपर पीतल का हेलिक्स या पिरामिड लगा सकते हैं।
  • यदि आपका मुख्य द्वार उत्तर-पश्चिम की ओर है, तो आप दरवाजे के ऊपर लोहे का हेलिक्स या पिरामिड लगा सकते हैं।
  • यदि आपका मुख्य द्वार दक्षिण-पूर्व की ओर है, तो आप दरवाजे के ऊपर कांसे का हेलिक्स या पिरामिड लगा सकते हैं।

इन उपायों से आप अपने घर के मुख्य द्वार की दिशा में सुधार कर सकते हैं और अपने घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ा सकते हैं।

वास्तु शास्त्र के अनुसार मुख्य द्वार की अन्य विशेषताएं

  • मुख्य द्वार हमेशा बड़ा और चौड़ा होना चाहिए। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह आसानी से होता है।
  • मुख्य द्वार हमेशा सीधा और खुला होना चाहिए। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं होता है।
  • मुख्य द्वार के सामने कोई पेड़ या खंभा नहीं होना चाहिए। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।
  • मुख्य द्वार के सामने कोई कूड़ा-करकट या गंदगी नहीं होनी चाहिए। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।

वास्तु शास्त्र के इन सिद्धांतों का पालन करके आप अपने घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ा सकते हैं और अपने घर के निवासियों के जीवन को बेहतर बना सकते हैं।

क्या वास्तु शास्त्र का पालन करना अनिवार्य है?

वास्तु शास्त्र को पालन करना अनिवार्य नहीं है। हालांकि, यह माना जाता है कि वास्तु शास्त्र का पालन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और यह घर में रहने वालों के लिए खुशहाली और समृद्धि लाता है।

क्या मैं अपने मौजूदा घर के मुख्य द्वार की दिशा बदल सकता/सकती हूँ?

हां, आप अपने मौजूदा घर के मुख्य द्वार की दिशा बदल सकते/सकती हैं। हालांकि, यह एक बड़ा बदलाव है, इसलिए किसी वास्तु विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित होगा।

मुख्य द्वार पर क्या रंग सबसे शुभ होता है?

मुख्य द्वार पर लाल, पीला, नारंगी या हरा रंग सबसे शुभ माना जाता है।

क्या मुख्य द्वार के सामने कोई पेड़ या पौधा होना चाहिए?

नहीं, मुख्य द्वार के सामने कोई पेड़ या पौधा नहीं होना चाहिए। यह वास्तु दोष माना जाता है।

क्या मुख्य द्वार के सामने कोई सीढ़ी हो सकती है?

नहीं, मुख्य द्वार के सामने कोई सीढ़ी नहीं होनी चाहिए। यह भी वास्तु दोष माना जाता है।

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